हम खुद जंगल के जंगल समाप्त कर रहे है, पशुऒ की प्रजातियों का सफाया कर रहें हैं, नदीयों और समुंद्रो को प्रदूषित कर रहे हैं, हवा में जेहर घोल रहे हैं.
इस पर जब कुदरत रिएक्ट करती हैं, तो हम उसे ‘नेचुरल कैलेमिटी’ का नाम देकर उल्टा कुदरत पर ही बिल फाड़ देते हैं.
हमारी गिरने की कोइ सीमा ही नहीं.
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